शिवसेना के संस्थापक बाला साहब ठाकरे के पुत्रवधू स्मिता ठाकरे ने गयाजी में किया तर्पण एवं पिण्ड दान
Gaya
शिवसेना के संस्थापक बाला साहब ठाकरे के पुत्रवधू स्मिता ठाकरे ने गयाजी में किया तर्पण एवं पिण्ड दान
अनिल मिश्र/गया जी
सनातन धर्म में देवी-देवताओं के बाद पितरों का भी स्थान है। पितर यानी हमारे पूर्वज जो इस धरती पर हमलोग से पहले आयें जिनका हमलोग वंशज हैं । सनातन धर्म में देवी-देवताओं के साथ -साथ पूर्वजों को भी पूजनीय माना जाता है। इसीलिए इन्हें भी पूजा- अर्चना किया जाता है। वैसे बिहार की धार्मिक नगरी गया जी में प्रतिदिन इन मृत आत्माओं के शांति प्रदान करने के लिए श्राद्ध कर्म, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। लेकिन वर्ष में एक बार जिसे पितृपक्ष कहा जाता है।जो आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से लेकर महालया यानी अमावस्या तक यह कर्मकांड जोरों पर होता है। इसके लिए बिहार सरकार और जिला प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से राजकीय मेला का आयोजन किया जाता है।इस वर्ष 25 सितबंर से प्रारंभ हुए यह मेला 10 अक्टूबर तक चलेगा।इस बीच देश और विदेश के कोने -कोने से श्रद्धालु आकर अपने पितरों को मोक्ष प्रदान करने के लिए श्राद्ध कर्म, तर्पण और पिंडदान आदि कर्मकांड आमलोगों के साथ -साथ नौकरशाह, व्यवसायी, फिल्म अभिनेता,टीवी कलाकार के साथ राजनेता भी कर रहे हैं।इसी सिलसिले में आज पितृपक्ष मेले के दौरान मंगलवर को मराठा छत्रप और शिवसेना संस्थापक बाला साहेब ठाकरे की पुत्रवधू स्मिता ठाकरे गया पहुंचीं।इस बीच उन्होंने अपने ससुर बाला साहेब ठाकरे और पिता का विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया।इस बीच पिंडदान के बाद स्मिता ठाकरे ने कहा कि गया जी की पावन धरती पर आकर पितरों का स्मरण करना उनके लिए सौभाग्य की बात है।इस बीच उन्होंने बताया कि लंबे समय से गया आने की इच्छा थी, जो गुरु के आशीर्वाद से पूरी हुई है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पहले उन्हें लगता था कि महिलाएं पिंडदान नहीं करतीं हैं ।हालांकि, गुरु से माता सीता द्वारा गया में पिंडदान किए जाने की कथा सुनने के बाद उन्हें भरोसा हुआ और उन्होंने खुद तर्पण और पिंडदान किया।इस बीच उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सनातन धर्म को संस्कृति, कर्तव्य, समाजसेवा और जीवन जीने की परंपरा बताया।इस बीच स्मिता ठाकरे ने कहा कि पिंडदान के बाद उनका मन भावुक हो गया।इस बीच उन्होंने कहा कि पितरों को याद करते हुए कई बार ऐसा होता है कि कुछ पूर्वजों को हम भूल जाते हैं।गया जी में पितृपक्ष मेला में श्राद्ध कर्म, तर्पण और पिंडदान करने के दौरान उन्हें लगा कि सभी पितरों को स्मरण कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई है। गया जी में आकर और अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म, तर्पण और पिंडदान कर धन्य हो गई।
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By किशोर अनिल
सीनियर एडिटर
राजनीति और राज्य मामलों पर दो दशक का अनुभव।

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