GAYA: पितृपक्ष के अंतिम दिन एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पितृ अमावस्या पर अपने पितरों के मोक्ष प्रदान करने के लिए गया जी में किए तर्पण और पिंडदान

Author किशोर अनिल | Writer अनिल मिश्रा
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GAYA : पितृपक्ष के अंतिम दिन एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पितृ अमावस्या पर अपने पितरों के मोक्ष प्रदान करने के लिए गया जी में किए तर्पण और पिंडदान

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पितृपक्ष के अंतिम दिन एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पितृ अमावस्या पर अपने पितरों के मोक्ष प्रदान करने के लिए गया जी में किए तर्पण और पिंडदान 

 

अनिल मिश्र/ पटना 

 

 मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कल शनिवार को सपरिवार विश्व प्रसिद्ध गयाजी का दौरा कर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए विधि-विधान से तर्पण और पिंडदान किया।इस बीच उन्होंने निरंजना नदी और फल्गु नदी के तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अपने पितरों का तर्पण किया। उसके बाद उन्होंने बोधगया स्थित आदि शंकराचार्य मठ का दौरा किया, जहां उन्होंने वैराही देवी, कुलदेवी मां अन्नपूर्णा, जगद्गुरु और ठाकुरवाड़ी में पूजा-अर्चना की। इसके अलावा उन्होंने प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर के भी दर्शन किए।इस बीच मठ पहुंचने पर महंत त्रिवेणी गिरी, स्वामी विवेकानंद गिरी और मनोज पाठक ने उनका स्वागत किया। कल शनिवार को गया जी में पितृपक्ष मेले का अंतिम दिन था ।पितृपक्ष मेले के अंतिम दिन अपने पितरों-पूर्वजों को तर्पण करने काफी संख्या में लाखों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ती है।इस बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फल्गु नदी के तट पर अपने पितरों के निमित्त तर्पण किया। इसके बाद बोधगया शंकराचार्य मठ को पहुंचे।वहां, कुलदेवी की पूजा अर्चना की।इस बीच आचार्य और पुरोहितों की मौजूदगी में पूजा अनुष्ठान पूरे विधि विधान के साथ संपन्न हुआ। गयाजी में तर्पण पर मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री ने अपनी बातें भी रखी। मध्य प्रदेश सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा, कि गया जी मोक्ष की धरती है।यह परंपरा युगों-युगों से चली आ रही है। सनातन धर्म में पितरों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है. यही वजह है, कि गया जी की प्रसिद्धी देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक प्रसिद्ध है। आपको बताते चलें कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी बिहार यात्रा के दौरान गया पहुंचे, जहां उन्होंने सनातन परंपरा के तहत पितृपक्ष के अंतिम दिन पवित्र फल्गु नदी के तट पर विधि-विधान से तर्पण और पिंडदान किया। गया एयरपोर्ट पर आगमन के बाद मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से बोधगया मठ पहुंचे और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। सनातन धर्म में पितरों की मुक्ति और मोक्ष की कामना के लिए गयाजी और फल्गु नदी के तट का विशेष महत्व माना जाता है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने पहुंचते हैं।

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राजनीति और राज्य मामलों पर दो दशक का अनुभव।

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