नेपाल में तबाही: बिहार में हाई अलर्ट, रूट चार्ट से समझिए तिब्बत से गंडक तक कैसे पहुंचता है पानी, इन जिलों पर सबसे ज्यादा खतरा

Author किशोर अनिल
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नेपाल में तबाही: बिहार में हाई अलर्ट, रूट चार्ट से समझिए तिब्बत से गंडक तक कैसे पहुंचता है पानी, इन जिलों पर सबसे ज्यादा खतरा

बिहार

Nepal Flood: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने बिहार की चिंता बढ़ा दी है, लेकिन आखिर नेपाल का पानी बिहार तक कैसे पहुंच सकता है? दरअसल, भोटे कोशी से निकला पानी त्रिशूली और नारायणी होते हुए भारत में गंडक बन जाता है. यही नदी बिहार के कई जिलों से होकर गुजरती है, इसलिए जलस्तर बढ़ने पर इन इलाकों पर असर पड़ सकता है. पूरा रूट चार्ट समझिए.

Nepal Flood: नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी. तिब्बत की ओर से आया तेज पानी भोटे कोशी नदी में पहुंचा. इसके बाद देखते ही देखते नदी का जलस्तर बढ़ गया. तिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाके में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ. सड़क, पुल और दूसरी संपत्तियां पानी की चपेट में आ गईं.

अब इस बाढ़ ने बिहार की चिंता भी बढ़ा दी है. वजह है इसका नदी वाला रास्ता. भोटे कोशी और त्रिशूली नदी की जल प्रणाली आगे जाकर नारायणी से जुड़ती है. भारत में प्रवेश करने के बाद नारायणी को गंडक नदी कहा जाता है. यही गंडक बिहार के कई जिलों से होकर गुजरती है.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि नेपाल की बाढ़ का पानी तुरंत बिहार में बाढ़ ला देगा. बिहार पर असर कितना होगा, यह पानी की मात्रा, रास्ते में दूसरी नदियों के बहाव, बारिश और बैराज की स्थिति पर निर्भर करेगा.

आखिर नेपाल में क्या हुआ?

बुधवार सुबह करीब 9 बजे रसुवा में भोटे कोशी नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी पहुंचा. नेपाल के अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ तिब्बत की ओर से आई थी. शुरुआती आकलन में बर्फीले मलबे के कारण नदी का रास्ता रुकने और फिर अचानक टूटने की आशंका जताई गई है.

बाढ़ ने तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और रसुवागढ़ी क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया. कई पुल और सड़कें बह गईं. बड़ी संख्या में लोग लापता बताए गए हैं. राहत और बचाव अभियान जारी है.

तिब्बत से बिहार तक कैसे पहुंचेगा पानी?

इसे आसान भाषा में समझिए. नेपाल की इस बाढ़ का पानी जिस नदी तंत्र से आगे बढ़ता है, उसका रास्ता काफी लंबा है.

तिब्बत → भोटे कोशी → त्रिशूली → नारायणी → भारत में गंडक → बिहार → गंगा

भोटे कोशी तिब्बत की तरफ से नेपाल में आती है. आगे इसका जल तंत्र त्रिशूली नदी से जुड़ता है. त्रिशूली नेपाल के कई इलाकों से होकर आगे बढ़ती है. देवघाट के पास त्रिशूली का पानी काली गंडकी से मिलता है. इसके बाद नदी को नारायणी कहा जाता है.

नारायणी भारत में प्रवेश करने के बाद गंडक के नाम से जानी जाती है. फिर यह बिहार के मैदानी इलाकों से गुजरते हुए हाजीपुर-सोनपुर क्षेत्र के पास गंगा में मिल जाती है.

इसलिए बिहार में बढ़ी चिंता

यही नदी कनेक्शन बिहार के लिए सबसे अहम है. नेपाल में अचानक पानी बढ़ने पर उसका असर आगे नारायणी और फिर गंडक के जलस्तर पर पड़ सकता है.

नेपाल के अधिकारियों ने भोटे कोशी के बाद त्रिशूली नदी के किनारे बसे इलाकों में भी सतर्कता बढ़ाई है. बाढ़ का पानी नीचे की ओर बढ़ रहा है.

इसलिए बिहार में भी गंडक के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है. फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि नेपाल की बाढ़ से बिहार में तत्काल बाढ़ आएगी. इसके लिए नेपाल से आने वाले पानी की वास्तविक मात्रा और अगले कुछ घंटों की स्थिति महत्वपूर्ण होगी.

बिहार के किन जिलों पर पड़ सकता है असर?

अगर नेपाल से बड़ी मात्रा में पानी गंडक में पहुंचता है, तो नदी के किनारे बसे बिहार के जिलों पर दबाव बढ़ सकता है.

पश्चिमी चंपारण

गंडक बिहार में पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकिनगर क्षेत्र से जुड़ती है. यहां वाल्मीकिनगर बैराज बेहद महत्वपूर्ण है. पानी बढ़ने पर नदी के आसपास के इलाकों में दबाव बढ़ सकता है.

पूर्वी चंपारण

गंडक के जलस्तर में बढ़ोतरी का असर जिले के नदी किनारे वाले क्षेत्रों में पड़ सकता है. निचले इलाकों में बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ सकता है.

गोपालगंज

गोपालगंज गंडक के लिहाज से संवेदनशील इलाकों में शामिल है. नदी में अचानक उफान आने पर निचले क्षेत्रों में पानी फैलने की आशंका रहती है.

सीवान

गंडक नदी तंत्र से जुड़े इलाकों में पानी बढ़ने पर सीवान के सीमावर्ती और निचले क्षेत्रों पर भी असर पड़ सकता है.

मुजफ्फरपुर

गंडक के बढ़ते जलस्तर का असर जिले के पश्चिमी हिस्सों में दिख सकता है. ज्यादा पानी आने पर जलभराव और कटाव का खतरा बढ़ सकता है.

सारण

गंडक आगे सारण से होकर हाजीपुर की ओर बढ़ती है. इसलिए छपरा और आसपास के क्षेत्रों में भी नदी के जलस्तर पर नजर रखना जरूरी होगा.

वैशाली

हाजीपुर के पास गंडक का गंगा में संगम होता है. ऐसे में गंडक के बढ़ते जलस्तर का असर नदी किनारे के इलाकों में देखा जा सकता है.

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क्या बिहार में अभी बाढ़ का खतरा है?

अभी तुरंत बाढ़ की बात कहना जल्दबाजी होगी. नेपाल में आई बाढ़ का पानी बिहार तक पहुंचने में कई चरणों से गुजरता है. इस दौरान नदी की चौड़ाई, दूसरी नदियों का पानी, बारिश और बैराजों की स्थिति अहम भूमिका निभाती है.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भोटे कोशी का पानी त्रिशूली नदी तंत्र में पहुंच चुका है. नेपाल में नदी किनारे के इलाकों को सतर्क किया गया है.

अगर पानी की बड़ी मात्रा नारायणी तक पहुंचती है और फिर गंडक में आती है, तो बिहार में नदी का जलस्तर बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में पश्चिमी चंपारण से लेकर गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, सीवान, मुजफ्फरपुर, सारण और वैशाली तक निगरानी बढ़ानी होगी.

वाल्मीकिनगर बैराज क्यों है सबसे अहम?

बिहार में गंडक नदी पर बना वाल्मीकिनगर बैराज बेहद महत्वपूर्ण है. यहां से नदी के पानी को नियंत्रित किया जाता है. नहरों के जरिए सिंचाई के लिए भी पानी छोड़ा जाता है.

नेपाल से आने वाले पानी की मात्रा बढ़ने पर बैराज और गंडक के जलस्तर पर खास नजर रखी जाती है. अगर नदी में अचानक ज्यादा पानी आता है, तो तटवर्ती इलाकों में बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ सकता है.

अभी सबसे जरूरी क्या है?

नेपाल की बाढ़ की स्थिति तेजी से बदल रही है. इसलिए बिहार के लिए सबसे अहम बात है गंडक के जलस्तर और नेपाल से आने वाले पानी की निगरानी.

अभी इसे बिहार में बाढ़ की दस्तक मानना सही नहीं होगा. लेकिन नदी का सीधा कनेक्शन देखते हुए सतर्क रहना जरूरी है. नेपाल से आने वाले पानी की मात्रा बढ़ती है तो गंडक के किनारे बसे जिलों में इसका असर दिखाई दे सकता है.

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सीनियर एडिटर

राजनीति और राज्य मामलों पर दो दशक का अनुभव।

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